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Refined Oils : The Truth

कितना अच्छा है आपका

Refined Oil

एक जानने योग्य सच्चाई।

हजारो सालो से हम भारतीय खाना बनाने के लिए पारम्परिक तेलों का प्रयोग करते आये हैं। पूरे भारत में अलग अलग भौगोलिक जगहों पर होने वाले पारम्परिक वनस्पति तेलों का प्रयोग होता आया है। उदाहरण के लिए उत्तर भारत जैसे पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सरसो की खेती होने से ज़्यादातर लोग सरसों का तेल इस्तेमाल करते है, वही राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में मूंगफली का तेल ज्यादा इस्तेमाल होता था, और दक्षिण भारत में नारियल की पैदावार ज्यादा होने से वहाँ नारियल के तेल का प्रयोग ज्यादा है। इन तेलों के साथ साथ देसी घी का प्रयोग पूरे भारत में होता था। सन 2000 में Globalization के बाद भारत पूरे विश्व की मंडियों के लिए खुल गया और यहीं से शुरू हुआ Refined Oil का खेल।

Cholesterol के नाम पर हमें डरा के हमें पारम्परिक तेलों से दूर करके Refined Oil खाने को बढ़ावा दिया जिसके परिणाम स्वरुप लगभग 20 साल बाद आज हम अनेक रोगो से पीड़ित हो गए है। ज्यादा पैसा कमाने के लिए बड़ी बड़ी कंपनियों ने Cholesterol से बचाव का झांसा देकर  टेलीविजन पर प्रचार करके हमे रिफाइंड तेल खाने को प्रेरित किया। लम्बे समय तक इस refined तेल को खाने से आजकल ना जाने कितने प्रकार के भयंकर रोग होने लगे हैं जो कभी हमे सुनने में भी नहीं आते थे।

क्या आप जानते है की जिस refined oil को हम अपने खाने में हर रोज़ प्रयोग करते है वह स्वस्थ्य के लिए कितना हानिकारक हो सकता है। आइये जानते है की किस प्रकार Refined Oil तैयार होता है और उसके बाद आप खुद ही फैसला करना की आपको Refined Oil खाना चाहिए या नहीं।

Method Of Preparing Refined Oil: बनाने की प्रक्रिया

Refined Oil को बनाने के लिए सबसे पहले जिस का भी रिफाइंड आयल बनाना है उस बीज का पहले तेल निकला जाता है उसके बाद ज्यादा production के लिए कुछ विशेष प्रकार के Chemical Solvents के द्वारा बचे खुचे छिलके से भी तेल निकाल लिया जाता है। इसके बाद तेल को Chemical Alkali से धोया जाता है। Alkali और तेल के इस मिश्रण को Centrifuge में डालकर अलग अलग कर लिया जाता है। प्राप्त तेल को इसके बाद साबुन के पानी से धोया जाता है ताकि तेल में मिली हुई Chemical Alkali साफ़ हो जाए। साबुन के पानी से धोने के बाद इस तेल को एकदम साफ़ दिखाने लिए अलग अलग प्रकार के Chemicals से Bleach किया जाता है जिससे तेल एकदम साफ़ दिखने लगता है। इसके बाद तेल से उसकी प्राकृतिक गंध निकालने के लिए उसे फिर से अलग अलग Chemicals के साथ Deodorized किया जाता है जिससे तेल की प्राकृतिक गंध चली जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया में तेल अपनी स्वाभाविक चिकनाहट को खो देता है और हमें प्राप्त होता है एक रुक्ष तेल जिसमे ना तो कोई पोषक तत्त्व है और ना ही कोई चिकनाहट।

Conclusion : निष्कर्ष

आपको क्या लगता है ? क्या इतने सारे Chemical , Heat और Pressure से प्रभावित होने के बाद यही तेल आपके स्वस्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है? जवाब आप जानते हैं।

Reason: कारण

दरअसल हम Western Society की धारणाओं से इतने प्रभावित हो गए हैं की अपनी खुद की विरासत को भुला बैठे हैं। तेल और उसकी चिकनाहट हमारे शरीर की कोशिकाओं को दृढ और बलवान बनाने में अति आवश्यक हैं। मोटापा , Heart Diseases , High BP , Cholesterol जैसे शब्दों ने हमें इतना डरा दिया है की हम अब किसी भी रूप में तेल और घी का प्रयोग करने से डरते है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में चिकनाहट न होने से हमारा शरीर हमारे खाये हुए खाने को ही fat में convert करके store करता रहता है इसी वजह से घी और तेल खाये बिना भी लोगो को मोटापे की समस्या आने लगती है। लम्बे समय तक पर्याप्त मात्रा में फैट के अभाव से रक्त कोशिकाएं ( Arteries ) रुक्ष होने लगती है जिससे उनका लचीलापन काम हो जाता है , जिससे Blood Vessels पूरे तरीके से फ़ैल नहीं पाती जिससे Blood Pressure बढ़ने लगता है (अक्सर आपने देखा होगा की जो लोग बिलकुल भी चिकना नहीं खाते उनका भी BP बढ़ा हुआ होता है)

शरीर में चिकनाहट के अभाव में रुक्षता आने लगती है और शरीर अपनी रुक्षता को ठीक करने के लिए अपने ही Fat का ही इस्तेमाल करने लगता जिससे Cholesterol बढ़ने लगता है। ( इसीलिए आपने देखा होगा की जो लोग घी और तेल नहीं भी खाते उनका भी Cholesterol बढ़ा हुआ होता है।

अच्छी बात यह है की कई समझदार और अनुभवी Cardiologist इस बात को समझ चुके है और अपने मरीज़ो को सही जानकारी दे रहे हैं। हमारा भी ये कर्त्तव्य बनता है की हम अपनी सांस्कृतिक विरासत पर विश्वास रखें क्यों की ये विरासत हजारो सालो से समय और विज्ञान के मापदंडो पे खरी साबित हुई है और अब Western Society भी इसके मजबूत सिद्धांतो को मानने लगी है। इसी कारण आयुर्वेद आज पूरे विश्व में प्रसिद्ध है और लोग Chemical दवाइयों से बचकर प्राकृतिक उपचार पर अग्रसर हो रहे हैं।

 

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